mr discount code mr kortings code FACE Classes: जरा सोचें

Monday, April 1, 2019

जरा सोचें



 जरा सोचें
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 इस सृष्टि में हमारे लेने के लिए इतना कुछ बिखरा हुआ है, तनी अनंत है ये सृष्टि कि हम जीवन भर पाते और समेटते रहे तो भी हमें लगेगा कि हमने तो अभी कुछ नहीं पाया। अभी तो ना जाने क्या-क्या  शेष है, पाने के लिएइसलिए कहा गया है कि यदि हम और कुछ ना ले,  केवल “प्रेरणा” ही ले लें तो हमें जीव में बहुत कुछ मिल जाएगा--- दूसरे शब्दों में  तब हम यह मान लें कि हमने बहुत कुछ पा लिया है

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बाहर से प्रेरणा लेने से पहले हमें अपने अंतःकरण की प्रेरणा की आवाज  को ही सुने तो हम देखेंगे कि हमने अपने जीवन को बहुत कुछ संवार लिया है, साथ ही  हम कई गलतियों और असफलताओं से बच गए हैं  हमारा अंत:रण कई बार  हमें प्रेरित करता है कि डरो मत, अमुक काम को  करो। लेकिन यदि हम उसकी उपेक्षा कर देते हैं तो बाद में पछताते हैं क्योंकि  अवसर और समय निकल चुका होता है 

2.हम और हमारा परिवार


दूसरी ओर यही अंतःकरण कई बार हमें कोई काम ना करने के लिए प्रेरित करता हैइस समय भी यदि हमने  उसकी आवाज  सुन ली  और उस  काम से दूर हट गए,  तो हम पाएंगे कि हम एक बड़ी मुसीबत से बच गए हैंमहात्मा गांधी तो यहां तक कहते थे ---निर्मल  अंतःकरण को  जिस समय  जो प्रतीत हो,  वही सत्य हैउस पर  दृढ़ रहने से  शुद्ध सत्य की प्राप्ति हो जाती हैवायरन  तो इससे भी आगे बढ़ गए उन्होंने कहा, " मानव का  अंतःकरण ही ईश्वर की वाणी है। " आवश्यकता होती है उसे ध्यान से सुनकर अमल में लाने की।

3. ImproveYour Mistake


 अंतः प्रेरणा का महत्व समझ कर जब हम अपने चारों ओर कि सृष्टि,  सारे जगत को देखते हैं तो हमें यहां भी बहुत कुछ प्रेरित करता है और  हमें उससे भी बहुत कुछ ग्रहण करना पड़ता है।  पहाड़  से   गिरती जलधार से,  फलों से लदे वृक्षों से हमें विनम्रता मिलती है;  धरती की धूल और घास हमें सहनशीलता देती है।  फूलों  से मुस्कान, चिड़ियों से  स्वतंत्रता आदि कितनी ही बातें मिलती है। 

4. परीक्षा देना भी एक कलाहै।


किंतु  सच तो यह है कि  भौतिकतावादी  सुखों  में आलिप्त और उसे 'और'  - 'और'   पाने की अंधी दौड़  हमें यह सोचने का  अवसर ही नहीं देती  कि हमें सृष्टि और प्रकृति से भी कुछ पाना है।  हम अपने ही माया जाल में उलझ कर छटपटा रहे हैं  मुक्ति का कोई मार्ग नहीं मिल रहा  है---- यह सब उसी का परिणाम है--- जिसे हम प्रेरणा की उपेक्षा कहते हैं।

5. जब मन न हो काम करने का .


किसी विद्वान ने ठीक कहा है----' प्रेरणा  वह प्रकाश स्रोत है  जो प्रतिकूलता के   घने कोहरे को  चीड़ कर  आशाओं की सतरंगी आभा  बिखेरती  है ।  अभाव की दर्द भरी दलदल से  समृद्धि का वन खड़ा करती है और आसक्ति के मलिन-  धूमिल आकाश में  सामर्थ्य का सूर्य उदय करती है। असफलता के असहाय क्षणों में प्रेरणा ही जीने का सहारा देती है।  आगे बढ़ने का हौसला देती  हैं।

6. जरूरी है सम्पूर्ण समर्पण


प्रेरणा ही है जो जीवन को जीवंत बना देती है।  वह हर तरह के  विषमताओं  में विश्वास की शक्ति  जगाती हैं।  दुर्गम और असंभव सा लगने वाला लक्ष्य सहजता  सरलता से मिल जाता है। इसी के द्वारा पतन पराभव  से जर्जर  मानसिकता,  प्रगति और उन्नति की ऊर्जा से ओतप्रोत हो जाती है।  फिर जीवन में  बिखराव रुकता है, भटकाव   थमता  है।  जब  उमंगो के अनगिनत  बुझे दीप जगमगा उठते हैं।

7. If NotNow Or Never


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 जापान में एक सेनापति था  जो थोड़े से सैनिकों और हथियारों के बलबूते पर ही अपने से बड़े शत्रु सैन्य दल को धराशाई कर देता था।  उसका नाम था - नोबुनागा । एक बार जब  शत्रु की सेना से लड़ने के लिए चला  तो उसने अनुभव किया कि उसके छोटे से सैन्य दल में उत्साह नहीं है जो शत्रु से भिने के लिए चाहिए।  तब वह उन सबको एक मंदिर में ले गया। उसने देवता के सामने प्रार्थना करके कहा - "मैं तीन बार सिक्का  उछालूंगा । 

8. मेरा संदेश


यदि सबसे अधिक बार "हेड" आया तो जीत होगी और यदि "टेल" आया तो हार होगी । यह अब  आपकी आज्ञा से होगा।   यह कहकर सेनापति नोबुनागा ने उन सैनिकों की उपस्थिति में देवता के सामने तीन बार सिक्का उछाला और तीनों बार "हेड" आया । यह देखकर सैनिक खुशी से चिल्ला पड़े -  "जीत हमारी  होगी"। हम  दुश्मन को मिटा देंगे  और वे जाकर अपने से कहीं बड़ी सेना से , इतनी बहादुरी से लड़े कि शत्रु को पराजय मिली।

9. Tips ToBe Popular


 विजय की खुशी में आयोजित समारोह में सेनापति नोबुनागा ने कहा - "यह जीत हमें उस  सिक्के द्वारा दी गई प्रेरणा से मिली है, जिसने हमें तीन बार हेड  दिखाया । जबकि यह सच है कि उन तीनों सिक्कों में दोनों ओर "हेड" ही था -- उनमें टेल तो था ही नहीं।  इसका मतलब है कि सिक्के की हेड  कि प्रेरणा हमारे अंदर आत्मविश्वास इतना  जगा दिया कि विजय तो हमारी ही होगी। जी हां,  आप प्रेरणा की आवाज सुनेंगे तो विजय आपकी ही होगी।


Just think


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 There is so much scattered to take us into this creation, it is infinite. Even if we are able to find and maintain life, we will feel that we have not found anything yet. Just do not know what's left, to get it. It has been said that if we do not take anything else, only take "inspiration", then we will get a lot in the organism - in other words then we suppose that we have achieved a lot.

10. Take theexamination normally.



Before taking inspiration from outside, if we listen to the voice of inspiration of our heart, then we will see that we have taken a lot of lives and we have escaped many mistakes and failures. Our hearts sometimes inspire us to do that, do not be afraid, do the same thing. But if we ignore him then he regrets later because the time and time have passed.

11. भीड़ से अलग बनें |


On the other hand, this motivation often inspires us not to do any work. Even if we hear his voice and move away from that work, we will find that we have escaped from a big trouble. Mahatma Gandhi even used to say so - "The time when the innocent mind is able to feel the same is true. Strengthening it, pure truth is attained. "The wire went further. They said, "The heart of human beings is the utterance of God." It is necessary to listen carefully to it and bring it into action.

12. A, B, C of Time Management



By understanding the importance of inner motivation, when we see the universe around us, the whole world, then here also motivates a lot and we have to accept a lot more from it. From the mountainous fall from the mountain, fruit trees bear humility; Earth's dust and grass gives us tolerance. Smiles from flowers, freedom from birds and so many things.


But the fact is that in the materialistic pleasures and the blind race of 'and' - and 'getting' does not even give us the opportunity to think that we have to get something from creation and nature too. We are stuck in our own enchanting mesh, there is no way of salvation- all this is the result of that --- which we call neglect of inspiration.


A scholar has said right ---- 'Motivation is a light source that spreads the dense fog of adversity and spreads the shadow of hope. Builds the building of prosperity from a bog of a bog, and the sun of power emerges in the dirty sky of attachment. Motivation in helpless moments of failure gives the support of living. Encourages to move forward.


It is the inspiration that makes life vibrant. He awakens the power of faith in every kind of inequality. The easy-to-find goal is easy to find inaccessible and impossible. By defeating the fall, it becomes impatient with the energy of progressive mentality, progress and progress. Then the scarcity in life stops, disorientation stops. When the lamp lights up the countless eyelashes of spirits.



There was a commander in Japan who, after a few soldiers and weapons, could only demolish the big enemy army. His name was - Nununaga. Once when he went to fight the enemy's army, he felt that there was no excitement in his small army team who wanted to confront the enemy. Then he took them all to a temple. He prayed in front of the deity and said - "I will toss the coin three times.


If the "head" comes most often, it will win and if "tail" comes then it will be lost. It will be from your command now. By saying this, Senapati Nungunaga had thrown the coin three times in front of the deity in the presence of those soldiers and had "head" three times. Seeing this, the soldiers shouted happily - "We will win". We will wipe out the enemy and they go and fight with a larger army than themselves, so bravely that the enemy is defeated.


In the ceremony held in the joy of Vijay, Senapati Nununaga said, "This victory has got us from the inspiration given by that coin, which showed us the head three times, whereas it is true that those three coins had" head "on either side - - They did not even have the tail. This means that the motivation of the head of the coin has given rise to such confidence in us that victory will be ours. Yes, you will hear the voice of inspiration, then victory is your own.


By :- FACE Classes


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